हर रोज दिए सी जलती हूँ।
मोम बन कर पिघहलती हूँ।।
तेरे साए के आशिआने मे पलती हूँ।
ये तेरी तपिश है,, हर रोज सौ दफा मैं मरती हूँ।।
~पूजा मिश्रा
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3 comments:
Awesome :)
thank you Taslima khan
thank you Taslima khan
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