वैसे तो समाज
ने किन्नरों को
कभी भी सामान
अधिकार और समाज
में उठने बैठने
के लिए इज़ाज़त
नहीं दी हैं, लेकिन
प्रयागराज में
चल रहे कुम्भ
मेले में इस इस
साल किन्नरों को
समाज में समानता
का पद दिलवाने
के लिए एक
नयी और बहुत
ही सुलझी हुई
पहल की हैं,
और किन्नरों के
लिए एक बहुत
महत्वपूर्ण कदम को
उठाया हैं|
आपको बता दे
की साल 2019 में 15 जनवरी
से 4 मार्च
तक प्रयागराज में
चलने वाला कुम्भ
मेला बहुत ही
ख़ास हैं क्योंकि
इस वर्ष इस धार्मिक
मेले में
किन्नरों के लिए
भी एक अलग
अखाड़ा गया हैं|
वैसे तो हमेशा
जहि 13 अखाड़ों
का आयोजन किया
जाता हैं लेकिन
इस वर्ष 14 अखाड़े बनाये
गए हैं, जिनमें
से एक अलग
अलग अखाड़ा किन्नरों
को दिया गया
हैं, जिसकी महामंडलेश्वर
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी हैं|
कहना बड़ा आसान
हैं की किन्नर
हमारे समाज का
हिस्सा नहीं हैं
और हम बाकी
लोगो की तरह
आम जीवन में
उनसे मिलना या
बाते करना पसंद
नहीं करते हैं,
लेकिन कभी सोचा
हैं किसी ने
की शादी - विवाह
जैसी रश्मो में
या फिर किसी
बच्चे के जन्म
उत्सव में किन्नरों
का आशीर्वाद क्यों माँगा
जाता हैं?
(courtesy-financialexpress)
(courtesy-financialexpress)
आपको बताते हैं इसी
जुडी कहानी की
क्यों किन्नरों का
आशीर्वाद शुभ माना जाता हैं
-
जब प्रभु श्री राम
अयोध्या छोड़ कर
वन में जा
रहे थे तो
उनके पीछे पीछे
उनकी प्रजा और
किन्नर भी दौड़
रहे थे, लेकिन
जब भगवान श्री
राम वापस अयोध्यानगरी
लौटे तब उनकी
प्रजा वहां नहीं
थी, वहां सिर्फ
कुछ किन्नर ही
उनके इंतज़ार में
थे, जिसे देख
कर भगवन राम
प्रसन्न हो गए
और उन्होंने किन्नरों
को आशीर्वाद दिया
की उनका आशीर्वाद
बहुत फलित माना
जाएगा इसलिए किसी
भी शुभ समय
जैसे शादी विवाह
और बच्चे के
जन्म में किन्नरों
का आशीर्वाद लिया
जाता हैं|
यहाँ तक की
कई लोगो का
ऐसा भी मानना
हैं की किन्नर
समाज का रहें
सहन और आम
जन जीवन बहुत
अलग होता हैं,
ऐसा पूरी तरह
से सच नहीं
हैं क्योंकि गुरु
किन्नरों के भी
होते हैं, बल्कि
उनके जन्म से
ले कर मरण
तक ऐसी कई
रश्में हैं जिन्हे
किन्नर निभाते हैं|
आइए आपको किन्नरों
से जुडी ख़ास
बाते बताते हैं
-
- किन्नर समाज के
भी अपने गुरु
होते हैं, जो
स्वयं किन्नर होते
हैं, पर सब
लोगो को यह
बात नहीं पता
होगी की किन्नरों
के गुरुओ की
ख़ास बात यह
मानी जाती हैं
की वह अपने
शिष्यों की मृत्यु
कब होगी इस
बात को पहले
ही भाप लेते
हैं|
- यहाँ तक की
किन्नरों से भेद
भाव करने वाला
समाज मानता हैं
की किन्नर की
कोई भी दुआएं
किसी भी व्यक्ति
के बुरे समय
अच्छे समय में
बदल सकती हैं,
और अगर आपको धन
लाभ चाहिए तो किसी
किन्नर से एक
सिक्का लेकर अपने
पर्स में रखे।
- आपको बता दे
की बाकी दूसरे
आम लोगो की
तरह ही किन्नर
समाज भी विवाह
के पवित्र बंधन
में बांधता हैं,
लेकिन किन्नर अपने
आराध्य देव अरावन
से विवाह करते
हैं, पर उनका विवाह
मात्र एक दिन
के लिए होता
है, क्योंकि ऐसा माना
जाता है कि
शादी के अगले
दिन किन्नरों के
अरावन देवता की
मृत्यु के साथ
ही इनका वैवाहिक
जीवन खत्म हो
जाता है।
- हम सभी ने
किन्नरों से जुडी
बहुत साड़ी बाते
सुनी होगी लेकिन
हम मुईन से
ज्यादातर लोग इस
बात को नहीं
जानते हैं की
किन्नरों की मौत
के बाद उसे
आधी रात को
समशान तक ले
जाय जाता हैं,
उसका अंतिम संस्कार
आधी रात को
किया जाता हैं
क्योंकि ऐसी मान्यता
हैं की अगर
कोई व्यक्ति मृत
किन्नर का अंतिम
संस्कार देख ले
तो वह अगले
जन्म भी किन्नर
के रूप में
जन्म लेता हैं|
- कभी भी किसी
किन्नर को जलाया
नहीं जाता हैं
बल्कि हमेशा किन्नरों
को दफनाया जाता
हैं|
- ज्यादातर
किन्नर बहुचरा माता की
पूजा अर्चना करते
हैं कि वह
अगले जन्म में
उन्हें किन्नर
के रूप में
न जन्मे|
- ऐसा माना जाता
हैं की किन्नरों
की दुआओ में
बहुत दम होता
हैं, इसलियरे गलती
से भी इनकी
बदुआ ना ले|
समाज ने भले
ही किन्नरों को
सामान अधिकार न
दिए हो लेकिन,
उनकी दुआओँ का
आदि यह समाज
भी हैं, इसलिए
कहते हैं कभी
किसी को छोटा
या बड़ा मत
समझो, इस जीवन
में सबके साथ
एक जैसा प्यारा
व्यवहार करो और
मन में एक
दूसरे के प्रति
संवेदना और लगाव
रखो|













