हर अगले पल की नई कहानी हो तुम।
मेरे अश्कों की भाषा,,
मेरे रूठे लफ्जो की निशानी हो तुम।।
ना जाने क्या हो तुम,,
कितना भी मिल जाओ मुझे कुछ कम ही हो तुम।
शायद पता है मुझे मेरे तो हो पर मेरे नहीं तुम।।
हर अगले पल की नई कहानी हो तुम।
मेरे अश्कों की भाषा,,
मेरे रूठे लफ्जो की निशानी हो तुम।।
ना जाने क्या हो तुम,,
कितना भी मिल जाओ मुझे कुछ कम ही हो तुम।
शायद पता है मुझे मेरे तो हो पर मेरे नहीं तुम।।
मुमकिन है कि कभी ना कभी तो टकराओगे
जिंदगी के सफर मे,
क्या तब भी यूँ ही नजरें चुराओगे,
या नजरें छुपाओगे,
या फिर लौट जाउोगे।।
~पूजा मिश्रा
वैसे तो समाज ने किन्नरों को कभी भी सामान अधिकार और समाज में उठने बैठने के लिए इज़ाज़त नहीं दी हैं , लेकिन प्रयागराज ...