Thursday, 27 April 2017

तेरा ख्याल

हर अगले पल की नई कहानी हो तुम।


मेरे अश्कों की भाषा,,


मेरे रूठे लफ्जो की निशानी हो तुम।।


ना जाने क्या हो तुम,,


कितना भी मिल जाओ मुझे कुछ कम ही हो तुम।


शायद पता है मुझे मेरे तो हो पर मेरे नहीं तुम।।

Sunday, 2 April 2017

सफर

मुमकिन है कि कभी ना कभी तो टकराओगे
जिंदगी के सफर मे,
क्या तब भी यूँ ही नजरें चुराओगे,
या नजरें छुपाओगे,
या फिर लौट जाउोगे।।
       ~पूजा मिश्रा

कुम्भ की विशेषतायें

वैसे तो समाज ने किन्नरों को कभी भी सामान अधिकार और समाज में उठने बैठने के लिए इज़ाज़त नहीं दी हैं ,   लेकिन प्रयागराज ...