Thursday, 17 March 2016

पुराना किस्सा

सब के सब मुझसे रूठे हैं,, ना जाने आज कौन सिरहाने आ बैठा।
आज बरसो बाद लगी जो सुकुन की आखँ अब कौन जगाने आ बैठा।
जिसको भुलाने की कोशिश मे सारी उम्र तमाम हुई आज वो दिल दहलाने वाली कहानी सुनाने कौन आ बैठा।
चदं पलो पहले ही तो सीखा था मुस्काना, हमने ना जाने वो पुराना किस्सा लिए कौन रूलाने आ बैठा।

उसने जब देखा सारी दुनिया मरहम रखने आयी है, ढुढं बहाना वो भी मुझ तक झूठे रस्मो को निभाने आ बैठा।
तनहाई के इस दौर मे एक रोंज ऐसा हुआ, यादो का आवारा पैमाना बन वो खुद ही बीती ऩज्म सुनाने आ बैठा।

Saturday, 5 March 2016

इतंहा

कभी साथ देने का वादा कर जाते हो,
तो कभी भूल जाने की इनायत दे जाते हो,
समझ ही नही पाती तुम मजबूर हो या मगरूर हो।

Tuesday, 1 March 2016

चाहत

मुझे भी औरो की तरह जीवन मे कई बार अाशा अौर निराशा मिली
कई पथरीले पथो पर मै एक सार चलती रही ताे कई बार रुक रुक रुक कर बिखरती रही।
मुझे भी औरो की तरह जीवन मे बहुत कुछ मिला, कभी खाली जेब अौर बंद मुठठी थी,
ताे कभी बदले मे मुस्कुराते चेहरे मिले।
कई दफा मै भी खिलखिलायी,
और एक सार चलती गई तो
कई दफे रास्ते बनते गए तो कभी हजारों बार मै मिटती गई।

कुम्भ की विशेषतायें

वैसे तो समाज ने किन्नरों को कभी भी सामान अधिकार और समाज में उठने बैठने के लिए इज़ाज़त नहीं दी हैं ,   लेकिन प्रयागराज ...