सब के सब मुझसे रूठे हैं,, ना जाने आज कौन सिरहाने आ बैठा।
आज बरसो बाद लगी जो सुकुन की आखँ अब कौन जगाने आ बैठा।
जिसको भुलाने की कोशिश मे सारी उम्र तमाम हुई आज वो दिल दहलाने वाली कहानी सुनाने कौन आ बैठा।
चदं पलो पहले ही तो सीखा था मुस्काना, हमने ना जाने वो पुराना किस्सा लिए कौन रूलाने आ बैठा।
उसने जब देखा सारी दुनिया मरहम रखने आयी है, ढुढं बहाना वो भी मुझ तक झूठे रस्मो को निभाने आ बैठा।
तनहाई के इस दौर मे एक रोंज ऐसा हुआ, यादो का आवारा पैमाना बन वो खुद ही बीती ऩज्म सुनाने आ बैठा।