Wednesday, 26 December 2018

तुम्हारा नाम

हर दिन दर्द के  नए पयाम लिखती हूँ


पन्ने खुद - बा - खुद काले स्याह होते रहते  हैं



ना जाने मैं ऐसा क्या नाम लिखती  हूँ

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