Thursday, 14 April 2016

अकेली

साजो़ शृगारं से सफेद रंग का नाता नही है।
ना आज ना कल कोई आता नही है।
कहती है दुनिया रंगों से मेरा जीवन भाता नही है।
मेरा चेहरा अब किसी को लुभाता नही है।
साजो़ शृगारं से मेरा कोई नाता नहीं है।
सड़को पर सजी गहनो की दुकान से मेरा कोई सामान आता नही है।
मेरे घर मे कोई मेरे नाम से खिलखिलाता नहीं है।
कहती है दुनिया रंग बिरंगी चीजों से मेरा नाता नहीं है।
मेरे लिए सादा कोना और आँसू है।
मुस्कुराहट मेरे चेहरे पर भाता नहीं है।
साजों शृगारं से मेरा कोई नाता नहीं है।।

4 comments:

Unknown said...

really inspired by your thoughts

sukun.writeups said...

Thank you so much madhu das

AmAn KhAn said...

Umda

AmAn KhAn said...

Umda

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