मुझे भी औरो की तरह जीवन मे कई बार अाशा अौर निराशा मिली
कई पथरीले पथो पर मै एक सार चलती रही ताे कई बार रुक रुक रुक कर बिखरती रही।
मुझे भी औरो की तरह जीवन मे बहुत कुछ मिला, कभी खाली जेब अौर बंद मुठठी थी,
ताे कभी बदले मे मुस्कुराते चेहरे मिले।
कई दफा मै भी खिलखिलायी,
और एक सार चलती गई तो
कई दफे रास्ते बनते गए तो कभी हजारों बार मै मिटती गई।
Tuesday, 1 March 2016
चाहत
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कुम्भ की विशेषतायें
वैसे तो समाज ने किन्नरों को कभी भी सामान अधिकार और समाज में उठने बैठने के लिए इज़ाज़त नहीं दी हैं , लेकिन प्रयागराज ...
-
Bhut kuch zinda hai ab bhi Bhut kuch bacha hai ab bhi Abhi to wo raat bhi na beeti meri Abhi kaha meri shaam aayi Abhi kaha teri rangat mere...
-
आज एक शक्श एक तस्वीर लाया था लिफ़ाफ़े में लिपटी हुई मेरी तकदीर लाया था कह रहा था मे किसी आँगन की सोभा बनूँगी उस तस्वीर से मेरी तकदीर ज...
2 comments:
Khubsurat hai jo aap ne likha hai
Jo maine bar bar padha hai
Acchi soch hai acche khayalaat hain
Deakhne aur samajhne ka nazariya bhi alag hai
Sukriya
Post a Comment